देश में कोरोना संक्रमण के फैलाव के बीच ‘फॉल्स निगेटिव’ मरीज मिलने से सरकार की चिंताएं और बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने माना कि देश में भी अब बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं, यह चिंता की बात है। ऐसे मरीजों से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे मरीजों को ‘फॉल्स निगेटिव’ कहा जाता है। दुनिया में करीब 30 फीसदी ऐसे मरीज मिले हैं।

मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण फैलने पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया, स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित रहें, इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ‘दीक्षा’ नामक ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया है, जिसे नर्सिंग स्टाफ व सभी वॉलंटियर को प्रशिक्षित किया जाएगा।

 

तीन दिन में बढ़े 1400 से ज्यादा मरीज, दो दिन में 38 मौतें, 410 हुए ठीक

देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीन दिन में 1443 नए मरीज बढ़ गए हैं। इनमें 24 घंटे में 773 नए केस आए हैं। वहीं, दो दिन में 38 लोगों की मौत हुई, जो 48 घंटे में सबसे ज्यादा है। मरीजों की तादाद अब 5274 हो गई है। 149 लोगों की जान जा चुकी है। 410 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार संक्रमण रोकने के लिए राज्यों के साथ लगातार काम कर रही है। मामले बढ़ने के साथ हमारा एक्शन भी तेज हो जाता है। हमारी कोशिश संक्रमण की कड़ी तोड़ने की होती है। इसीलिए राज्यों में हॉटस्पॉट वाले इलाकों में सख्ती बढ़ाई गई है।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं

कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) की दवा पर अग्रवाल ने कहा कि देश में इसकी कोई कमी नहीं है, न भविष्य में होगी। इस दवा को स्वास्थ्यकर्मियों के इस्तेमाल के लिए ही तय किया है। लिहाजा लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए। गौरतलब है कि सरकार ने इसके निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है।

अगले चार दिन में 10 हजार पहुंच सकती है संक्रमितों की संख्या

कोरोना मरीजों की संख्या सप्ताह के अंत यानी बाकी चार दिन में 10 हजार तक पहुंच सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दो दिनों में मरीजों में 34 फीसदी बढ़ोतरी के साथ आंकड़ा 4,789 हो गया। हालांकि बढ़ोतरी पहले के दो दिनों की तुलना में सबसे धीमी है।

इस दौरान 40 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई और आंकड़ा 3,577 पहुंच गया था। कयास लगाया जा रहा था कि बुधवार शाम तक मरीजों की संख्या पांच हजार के पार होगी, लेकिन दोपहर तक ही पांच हजार से ज्यादा मरीज हो गए। लॉकडाउन के 15 दिन बाद भी संक्रमण में इजाफा जारी है।

ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि चार दिन में मरीजों की संख्या दोगुनी हो सकती है। इसका सीधा असर अस्पतालों पर पड़ेगा। मरीजों की अत्यधिक भीड़ से अव्यवस्था पैदा हो सकती है। जानकारों का मानना है कि जांच स्तर बढ़ेगा तो संक्रमितों की संख्या भी बढ़ेगी।

लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में तीन गुना रफ्तार से हुई जांच

कोरोना जांच को लेकर भले सवाल खड़े हो रहे हों, लेकिन केंद्र सरकार अमेरिका और इटली की तरह जांच पर काम कर रही है। इन देशों में कोरोना का असर भारत की तुलना में कई गुना ज्यादा है लेकिन वहां भी जांच संक्रमण प्रभावित इलाकों में सबसे ज्यादा की गई। इसी मॉडल पर केंद्र ने लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में हॉटस्पॉट इलाकों में जांच का दायरा बढ़ाया।

सरकार ने 1 से 7 अप्रैल के बीच तीन गुना रफ्तार से जांच कराई। इस सप्ताह प्रति 100 सैंपल में पॉजिटिव मरीज औसतन 2.3 से 5.7 फीसदी मिले हैं। 21 दिन के लॉकडाउन से हपले विदेश से आने वाले या उनके संपर्क में आए लोगों की ही जांच हो रही थी। फिलहाल सरकार ने विदेशों से आने वाले और उनसे संपर्क में आने वालों के अलावा हॉटस्पॉट स्क्रीनिंग, जांच और घर-घर सर्वे तक कराया जा रहा है।

बुधवार को आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉ.रमन आर गंगखेड़कर ने बताया, अब तक 1,21,271 सैंपल की जांच हुई है। मंगलवार को 13,345 लोगों की जांच की गई। इनमें से 2,267 की जांच निजी लैब में हुई। फिलहाल आईसीएमआर के तहत 139 सरकारी और 65 निजी लैब में जांच जारी है।