मुम्बई । पूर्व कप्तान और बीसीसीआई चयन समिति के प्रमुख रहे दिलीप वेंगसरकर प्रतिभाओं की जबरदस्त पहचान के लिए जाने जाते हैं। टीम इंडिया के मौजूदा कप्तान विराट कोहली की प्रतिभा को भी सबसे पहले वेंगसरकर ने ही पहचाना था। वेंगसरकार के चयनसमिति के अध्यक्ष रहते ही महेन्द्र सिंह धोनी कप्तान बने और उन्होंने विराट कोहली का पक्ष लिया। वेंगसरकर ने कहा, ‘‘ प्रतिभा को परखना मेरा काम था। आप प्रतिभा को परखने में अच्छे हो सकते हैं लेकिन अगर कोई प्रतिभावान है तो उसे अवसर मिलना चाहिए।’’वेंगसरकर का मानना है कि वह चयनसमिति के अध्यक्ष पद से न्याय करने में इसलिए सफल रहे क्योंकि वह बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) के प्रतिभा अनुसंधान विकास विभाग (टीआरडीडब्ल्यू) से जुड़े थे जिसने धोनी जैसे क्रिकेटर की प्रतिभा को पहचाना था। 
टीआरडीडब्ल्यू हालांकि अब अस्तित्व में नहीं है। विराट के बारे में वेंगसरकर का कहना है कि वह आस्ट्रेलिया के इमर्जिंग टीम के दौरे पर चयनसमिति के अध्यक्ष के कहने पर पारी की शुरूआत करने को भी तैयार थे। विराट का यही रवैया वेंगसरकर को काफी पसंद आया। वेंगसरकर ने कहा, ‘‘ टीआरडीडब्ल्यू के अध्यक्ष के तौर पर मैंने जूनियर क्रिकेट में कोहली को कई बार देखा था। इसलिए जब मैं चयन समिति का अध्यक्ष बना, तो हमने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के एक इमर्जिंग टीम के दौरे के लिए चुना। मैं वहां था और जब मैंने उसे बल्लेबाजी करते देखा तो मुझे पता था कि वह क्रिकेट में बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार है।’’ वेंगसरकर से जब पूछा गया कि क्या कोहली को देखकर उन्हें लगा था कि वह 15 साल तक क्रिकेट खेलेंगे तो उन्होंने, ‘‘ आप कभी भी इस बात को तय नहीं हो सकते कि किसी खिलाड़ी का करियर कितना लंबा चलेगा। मैंने जो देखा वह एक असाधारण प्रतिभा थी और अगर आप प्रतिभा की पहचान कर सकते हैं तो आपको पता होगा कि किस खिलाड़ी के पास शीर्ष स्तर पर सफल होने की संभावना है। पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘ शीर्ष स्तर के लिए आपके पास कुछ अतिरिक्त कौशल होना चाहिए और कोहली में वह था।’’ उन्होंने कहा कि धोनी को 21 साल की उम्र में टीआरडीडब्ल्यू योजना में शामिल किया गया था जबकि इसके लिए 19 साल की उम्र निर्धारित थी।